प्रवाह
Thursday, September 30, 2010
खलिश
खलिश इस बात कि नहीं कि उसे ज़िन्दगी में नहीं पाया ,
कसक इस बात कि है वो कुछ लम्हों के लिए ज़िन्दगी में क्यों आया ?
Monday, September 13, 2010
ख्वाहिशे
यो तो ज़िन्दगी में कई ख्वाहिशे है, पर जो सबसे खूबसूरत है उसका नाम तुम हो .
Saturday, September 11, 2010
मुलाकात
खुद को बनाए रखने में कुछ इस तरह उलझे है आजकल,
कि खुद से मुलाकात किये अरसा बीत गया .
Wednesday, July 28, 2010
दिल तो बच्चा है जी.
मंजिलो की ख्वाहिश में निकला था घर से, कमबख्त रास्तो से दिल लगा बैठा .
होसला
कदम जैसे ही बढाए मैंने होसलो के साथ , मंजिले खुद मुझे तलाशने लगी ।
Saturday, June 19, 2010
न जाने वो खुद को यो क्यों सजा देता है ? हर बार मुझसे मिलने पर बस वो मुस्कुरा देता है
Saturday, May 8, 2010
वो सहमा क्यों है ?
वो सहमा क्यों है ?
जिंदा था जब, तो सब अकेला छोड़ गए मुझे ,
अब मेरी मौत पर ये लोगो का मजमा क्यों है ?
उसने ही दोए थे ये बेइंतेहा दर्द जब,
तो चोट के ये निशाँ देखकर वो सहमा क्यों है ?
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